कुत्ते **** (एक) कुत्ते हैं भौंकेंगे ही बात- बेबात चौकेंगे ही। (दो) ज़रुरत मुताबिक पूंछ हिलाते हैं वक्त की नजाकत देख दुम दबा निकल जाते हैं वफादार ही नहीं बुद्धिमान भी होते हैं कुत्ते (तीन) कुत्ते नहीं चाहते कि उनकी ही तरह कुछ और पैदा हों कुत्ते यदि हों भी तो मत आए उनकी सरहद में देखते नहीं हो पूरी ताकत लगा कर देते हैं तरी पार दूसरे कुत्ते को। (चार) कुत्ते आप से उतना ही प्रेम करते हैं जितना प्रेम वे आपसे पाते हैं बड़ा सटीक होता है उनका गणित मामूली आदमी के वश में नहीं किसी कुत्ते का प्रेम पाना मामूली आदमी में हिम्मत नहीं किसी कुत्ते से बैर करना भी। (पांच) नस्लों की विविधता में इनका कोई सानी नहीं किसी देश-काल, जलवायु में इन्हें कोई परेशानी नहीं मालूम हो जिसे अनुकूलन की कला क्या बिगाड़ सका है कोई उसका भला? (छ:) धनी, गरीब, सेठ-साहूकार मूर्ख, विद्वान , यहां तक कि खानाबदोश भी सब पालना चाहते हैं कुत्ते और अपनी- अपनी औकात के मुताबिक बाकायदा पालते भी हैं कुत्ते जरूरतों में क्यों शामिल हैं यह एक जरूरी सवाल है। (सात) बाघों की संख्या कम हो रही ह...