विस्मृति का सुख
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मैं कुछ भी याद रखने के पक्ष में नहीं हूं
यादें अंततः दुःख देती हैं
किसी के द्वारा किया गया उपकार भी
एक दिन हमें शर्मिन्दा करता है।
मैं कृतघ्न नहीं हूं
पर कृतज्ञता-ज्ञापन में संकोची हूं
मुझे प्रदर्शन की कला नहीं आती
मैं उस पीढ़ी का आखिरी वंशज हूं
जो औपचारिकता पूरी करने के बजाय
हृदय में किसी को बिठा लेते हैं।
विस्मृति में अद्भुत सुख है
किसी के द्वारा किया गया अपमान
किसी के द्वारा लुटाया गया प्यार
सब को भूल जाने से हम हल्का हो जाते हैं
सफर में कितना ढोयेंगे बोझ
सांसें उखड़ जाएंगी।
मैं ईश्वर को कठघरे में खड़ा नहीं कर सकता
पर इतना जरूर कहूंगा कि
कुछ लोग गलत समय मैं पैदा हो जाते हैं।
हे ईश्वर ! जरूरी समय फर
जरुरी लोगों को जरूर भेजा जाए।
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मैं कुछ भी याद रखने के पक्ष में नहीं हूं
यादें अंततः दुःख देती हैं
किसी के द्वारा किया गया उपकार भी
एक दिन हमें शर्मिन्दा करता है।
मैं कृतघ्न नहीं हूं
पर कृतज्ञता-ज्ञापन में संकोची हूं
मुझे प्रदर्शन की कला नहीं आती
मैं उस पीढ़ी का आखिरी वंशज हूं
जो औपचारिकता पूरी करने के बजाय
हृदय में किसी को बिठा लेते हैं।
विस्मृति में अद्भुत सुख है
किसी के द्वारा किया गया अपमान
किसी के द्वारा लुटाया गया प्यार
सब को भूल जाने से हम हल्का हो जाते हैं
सफर में कितना ढोयेंगे बोझ
सांसें उखड़ जाएंगी।
मैं ईश्वर को कठघरे में खड़ा नहीं कर सकता
पर इतना जरूर कहूंगा कि
कुछ लोग गलत समय मैं पैदा हो जाते हैं।
हे ईश्वर ! जरूरी समय फर
जरुरी लोगों को जरूर भेजा जाए।
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