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विस्मृति का सुख
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 मैं कुछ भी याद रखने के पक्ष में नहीं हूं
यादें अंततः दुःख देती हैं
किसी के द्वारा किया गया उपकार भी
एक दिन हमें शर्मिन्दा करता है।

मैं कृतघ्न नहीं हूं
पर कृतज्ञता-ज्ञापन में संकोची हूं
मुझे प्रदर्शन  की कला नहीं आती
मैं उस पीढ़ी का आखिरी वंशज हूं
जो औपचारिकता  पूरी करने के बजाय
हृदय में किसी को बिठा लेते हैं।

विस्मृति में अद्भुत सुख है
किसी के द्वारा किया गया अपमान
किसी के द्वारा लुटाया गया प्यार
सब को भूल जाने से हम हल्का हो जाते हैं
सफर में कितना ढोयेंगे बोझ
सांसें उखड़ जाएंगी।

मैं ईश्वर को कठघरे में खड़ा नहीं कर सकता
पर इतना जरूर कहूंगा कि
कुछ लोग गलत समय मैं पैदा हो जाते हैं।

हे ईश्वर ! जरूरी समय फर
जरुरी लोगों को जरूर भेजा जाए।

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बिना पूंजी के रोजगार ***************** आलीशान, ऊंचे महल में चींटियां  छिद्र ढूंढ़ती हैं एक नौसिखुआ आलोचक उत्तम कलाकृति की खामियां गिनाता है कोई कुटिल,कुपाठी हर प्रसंग में अपना टांग अड़ाता है नौका में सवार मुफ्तखोर, निठल्ला नखों से नाव में छेद बनाता है कोई दुस्साहसी मुंह ऊपर उठाकर आकाश पर जोर से थूकता है बिना पूंजी के इतने सारे रोजगार हैं यहां मंदबुद्धि मंदी पर मगजमारी कर रहे हैं।
बात जो सबसे जरुरी है ****************** कुछ बातें पूछी नहीं जातीं कुछ बातें कही नहीं जाती सिर्फ महसूस की जाती हैं जरा सा भी चूक हुई  कि नष्ट हो जाती है मर्यादा मनुष्य, मनुष्य नहीं रह जाता इसलिए जो बात पूछी न जाए उसे जरूर पूरी की जाए और जो बात कही न जाए उसे ध्यान से सुना जाए ध्यान रहे जो बातें सबसे जरुरी होती हैं उन्हें कहना-सुनना जरूरी नहीं होता।