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बाधा- दौड़
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फरियादी और हाकिम के बीच
महज टेबल भर का फासला था।

मिलना बहुत जरूरी था
वक्त की नजाकत को समझते हुए उसने
बाधाओं को झेलने का मन बना लिया था

कान सुनने के अभ्यस्त-अभिशप्त हो गये थे-
साहब मीटिंग में बिजी हैं
जरुरी काम से दौरे पर हैं
संचिकाओं में डुबे हुए हैं
आज मूड बहुत गरम है
(ए.सी.में बैठने के बावजूद)
और दरवाजे छेंक कर बैठा वह निजी सहायक
पुरानी फिल्मों का क्रूर खलनायक!

काफी जद्दोजहद के बाद
कुछ पाबंदियां रखीं ग‌ईं
कविताओं में बात नहीं रखनी है
कार्यालय की भाषा का इस्तेमाल हो
अनुरोध करें, शिकायत बिल्कुल नहीं
नियम का हवाला दे नहीं सकते

फरियादी दर्द से कराह रहा था
उसकी आवाज गायब हो गई
वह गिरते-गिरते बचा
मुंसिफ की कुर्सी पर मुजरिम बैठा था।

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हमें समझ जाना चाहिए था  -------------------------------- इच्छा थी कि दो क़दम आगे बढ़कर करूं स्वागत  पर वे अनदेखा कर बगल से निकल ग‌ए मैंने उनकी व्यस्तता समझी  वे चले गए और मैं उन्हें रोज याद करता रहा मैंने उन्हें चिट्ठियां लिखी  संदेश भेजा मैसेंजर पर  सोचा, ह्वाट्सएप से भेजकर देखूं  वह भी किया  सब कुछ लाजवाब रहा  बहुत दिनों तक मैं सोचता रहा  वे तो बड़े अच्छे आदमी हैं  मामूली लोगों के लिए खूब लिखते हैं  फिर एक मामूली आदमी कैसे रह गया अलक्षित  मुझे तो बहुत पहले समझ जाना चाहिए था मामूली आदमी के लिए लिखने वाले  मामूली आदमी की लड़ाई कभी नहीं लड़ते  सचमुच वे कोई मामूली आदमी नहीं है  यह हमें बहुत पहले समझ जाना चाहिए था। @ ललन चतुर्वेदी
बिना पूंजी के रोजगार ***************** आलीशान, ऊंचे महल में चींटियां  छिद्र ढूंढ़ती हैं एक नौसिखुआ आलोचक उत्तम कलाकृति की खामियां गिनाता है कोई कुटिल,कुपाठी हर प्रसंग में अपना टांग अड़ाता है नौका में सवार मुफ्तखोर, निठल्ला नखों से नाव में छेद बनाता है कोई दुस्साहसी मुंह ऊपर उठाकर आकाश पर जोर से थूकता है बिना पूंजी के इतने सारे रोजगार हैं यहां मंदबुद्धि मंदी पर मगजमारी कर रहे हैं।
बात जो सबसे जरुरी है ****************** कुछ बातें पूछी नहीं जातीं कुछ बातें कही नहीं जाती सिर्फ महसूस की जाती हैं जरा सा भी चूक हुई  कि नष्ट हो जाती है मर्यादा मनुष्य, मनुष्य नहीं रह जाता इसलिए जो बात पूछी न जाए उसे जरूर पूरी की जाए और जो बात कही न जाए उसे ध्यान से सुना जाए ध्यान रहे जो बातें सबसे जरुरी होती हैं उन्हें कहना-सुनना जरूरी नहीं होता।