शब्द बार-बार लौटते हैं
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जिन ध्वनियों को मुक्त कर
देते हो अपने दिल को तसल्ली
अपने को हल्का महसूस करते हो
वे नहीं लौटते तुम्हारे पास।
पर इनकी प्रतिध्वनियां
गुंजती रहती हैं उन कानों में
जिनके लिए करते हो इनका प्रयोग
जिम्मेदार व्यक्तियों के शब्द तो
उद्धृत होते हैं बार-बार
कुछ शब्द तो दर्ज हो जाते हैं इतिहास में
साक्षी है समय
शब्द पुरस्कृत किये जाते हैं
शब्द करते हैं मरहम का काम
जो नहीं समझते शब्द का मर्म
गाहे-बगाहे चलाते रहते हैं शब्दभेदी बाण
भले ही वापस नहीं लौटे श्रवण कुमार
पर उसके माता-पिता के
कातर शब्दों की प्रतिध्वनियां
गुंजती हैं जनमानस में बार-बार
हो न जाए कोई अनर्थ, अनाचार
इसलिए शब्दों को मुक्त करने के पहले
कवि करता है बहुत सोच-विचार।
ह
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जिन ध्वनियों को मुक्त कर
देते हो अपने दिल को तसल्ली
अपने को हल्का महसूस करते हो
वे नहीं लौटते तुम्हारे पास।
पर इनकी प्रतिध्वनियां
गुंजती रहती हैं उन कानों में
जिनके लिए करते हो इनका प्रयोग
जिम्मेदार व्यक्तियों के शब्द तो
उद्धृत होते हैं बार-बार
कुछ शब्द तो दर्ज हो जाते हैं इतिहास में
साक्षी है समय
शब्द पुरस्कृत किये जाते हैं
शब्द करते हैं मरहम का काम
जो नहीं समझते शब्द का मर्म
गाहे-बगाहे चलाते रहते हैं शब्दभेदी बाण
भले ही वापस नहीं लौटे श्रवण कुमार
पर उसके माता-पिता के
कातर शब्दों की प्रतिध्वनियां
गुंजती हैं जनमानस में बार-बार
हो न जाए कोई अनर्थ, अनाचार
इसलिए शब्दों को मुक्त करने के पहले
कवि करता है बहुत सोच-विचार।
ह
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