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यह उदास होने का समय नहीं है
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एक नायिका की तस्वीर को
हजारों लोग 'लाइक 'कर चुके हैं
तरह- तरह के इमोजी चस्पा हो चुके हैं।

एक निहायत भद्दा  पोस्ट पर
कमेंट का रुक नहीं रहा है सिलसिला
शेयर किया जा रहा है लगातार।

एक बौद्धिक शख्स
शरीफों को रोज गालियां बककर
सुर्खियां बटोर रहा है।

और कुछ लोग
बौद्धिक जुगाली में व्यस्त हैं
अति उत्साह में हैं कि
अपने विचारों से बदल देंगे दुनिया।

कुछ लोग आज भी
इस आभासी दुनिया से बाहर
सौन्दर्य की तलाश कर रहे हैं
उनका मानना है कि
धीरे-धीरे लोग लौट जायेंगे
सही रास्ते पर
आमने-सामने एक-दूसरे को देखकर
मुस्करायेगे और गले मिलेंगे।
किताब की दुकानों में रौनक लौटेगी
खरीदेंगे लोग  किताबों के साथ जिल्द
पढ़ेंगे और रखेंगे सुरक्षित बच्चों के लिए भी
फिर से लोग सुनेंगे महेन्द्र मिश्र के गीत
फिर से प्रकट होंगे भिखारी ठाकुर
इतिहास स्वयं को दोहराता है
क्यों निराश हुआ जाए
कविते!अभी उदास होने का समय नहीं है।

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हमें समझ जाना चाहिए था  -------------------------------- इच्छा थी कि दो क़दम आगे बढ़कर करूं स्वागत  पर वे अनदेखा कर बगल से निकल ग‌ए मैंने उनकी व्यस्तता समझी  वे चले गए और मैं उन्हें रोज याद करता रहा मैंने उन्हें चिट्ठियां लिखी  संदेश भेजा मैसेंजर पर  सोचा, ह्वाट्सएप से भेजकर देखूं  वह भी किया  सब कुछ लाजवाब रहा  बहुत दिनों तक मैं सोचता रहा  वे तो बड़े अच्छे आदमी हैं  मामूली लोगों के लिए खूब लिखते हैं  फिर एक मामूली आदमी कैसे रह गया अलक्षित  मुझे तो बहुत पहले समझ जाना चाहिए था मामूली आदमी के लिए लिखने वाले  मामूली आदमी की लड़ाई कभी नहीं लड़ते  सचमुच वे कोई मामूली आदमी नहीं है  यह हमें बहुत पहले समझ जाना चाहिए था। @ ललन चतुर्वेदी
बिना पूंजी के रोजगार ***************** आलीशान, ऊंचे महल में चींटियां  छिद्र ढूंढ़ती हैं एक नौसिखुआ आलोचक उत्तम कलाकृति की खामियां गिनाता है कोई कुटिल,कुपाठी हर प्रसंग में अपना टांग अड़ाता है नौका में सवार मुफ्तखोर, निठल्ला नखों से नाव में छेद बनाता है कोई दुस्साहसी मुंह ऊपर उठाकर आकाश पर जोर से थूकता है बिना पूंजी के इतने सारे रोजगार हैं यहां मंदबुद्धि मंदी पर मगजमारी कर रहे हैं।
बात जो सबसे जरुरी है ****************** कुछ बातें पूछी नहीं जातीं कुछ बातें कही नहीं जाती सिर्फ महसूस की जाती हैं जरा सा भी चूक हुई  कि नष्ट हो जाती है मर्यादा मनुष्य, मनुष्य नहीं रह जाता इसलिए जो बात पूछी न जाए उसे जरूर पूरी की जाए और जो बात कही न जाए उसे ध्यान से सुना जाए ध्यान रहे जो बातें सबसे जरुरी होती हैं उन्हें कहना-सुनना जरूरी नहीं होता।