शो-केस के फूल
************
मुझे सजावटी मत कहो
बनावटी तो बिल्कुल नहीं
क्या हुआ, सुगंध नहीं है तो
कांटे भी तो नहीं हैं मुझमें
अपने अनोखे रंग और ताजगी से
दे रहा हूं मात सबको और
पूरी ठसक के साथ आसीन हूं
साहब की मेज पर।
अरे पगले गुलाब!
पाले रहो राजा होने का गुमान
कटते रहो, छंटते रहो
पीते रहो आंसू,खाते रहो धूप
सोते रहो कांटों की सेज पर
तुम्हारा सौभाग्य कहां कि
सज सको साहब की मेज पर।
बड़े गौर से सुनने के बाद
मुस्करा कर बोला गुलाब-
अबे! शो-केस में कैद गुलाम
यही तो तेरे और मेरे बीच फर्क है
हे चिरायु!सजे रहो तू चिर काल तक
पर मेरी क्षणभंगुरता का अपना तर्क है।
************
मुझे सजावटी मत कहो
बनावटी तो बिल्कुल नहीं
क्या हुआ, सुगंध नहीं है तो
कांटे भी तो नहीं हैं मुझमें
अपने अनोखे रंग और ताजगी से
दे रहा हूं मात सबको और
पूरी ठसक के साथ आसीन हूं
साहब की मेज पर।
अरे पगले गुलाब!
पाले रहो राजा होने का गुमान
कटते रहो, छंटते रहो
पीते रहो आंसू,खाते रहो धूप
सोते रहो कांटों की सेज पर
तुम्हारा सौभाग्य कहां कि
सज सको साहब की मेज पर।
बड़े गौर से सुनने के बाद
मुस्करा कर बोला गुलाब-
अबे! शो-केस में कैद गुलाम
यही तो तेरे और मेरे बीच फर्क है
हे चिरायु!सजे रहो तू चिर काल तक
पर मेरी क्षणभंगुरता का अपना तर्क है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें