वाचाल समय
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कहने को सब बेताब हैं
श्रोताओं का अकाल है
यह समय वाचाल है।
इस कहने की आपाधापी में
विवेक पीछे छूट गया है
सोचने की शक्ति क्षीण हो गई है
बुद्धि मंद, कंगाल है।
हर प्रश्न का त्वरित जवाब है
कौन परखे सत्य को और क्यों
किसे है इतना धैर्य
सबसे बड़ा यही सवाल है।
सिर्फ बोलना ही मकसद है
और प्रतिक्रिया देना भी
जो चुप है उसका बुरा हाल है।
मन आकुल- व्याकुल है
सब उसे पसंद करें
पर दूसरों की पसंद का किसे ख़्याल है।
समझ में बात आने लगी है अब
मौन भी एक साधना है
ज्यादा बोलना बचपना है।
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कहने को सब बेताब हैं
श्रोताओं का अकाल है
यह समय वाचाल है।
इस कहने की आपाधापी में
विवेक पीछे छूट गया है
सोचने की शक्ति क्षीण हो गई है
बुद्धि मंद, कंगाल है।
हर प्रश्न का त्वरित जवाब है
कौन परखे सत्य को और क्यों
किसे है इतना धैर्य
सबसे बड़ा यही सवाल है।
सिर्फ बोलना ही मकसद है
और प्रतिक्रिया देना भी
जो चुप है उसका बुरा हाल है।
मन आकुल- व्याकुल है
सब उसे पसंद करें
पर दूसरों की पसंद का किसे ख़्याल है।
समझ में बात आने लगी है अब
मौन भी एक साधना है
ज्यादा बोलना बचपना है।
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