दुःख
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दुःख हमारे सिर पर ठोकर मारने वाली चिड़िया है
जो कहीं से उड़ कर आती है अचानक
एक झटका देती है अकस्मात
जब तक संभलते हैं हम
वह फिर पहुंच जाती है
हम उसे पकड़ने की कोशिश करते हैं
वह फुर्र से उड़ जाती है
हम हैं कि कोशिश करते हैं बार-बार
उड़ती हुई चिड़िया को पकड़ने की
उसके चले जाने के बाद भी
करते रहते हैं ठोकर की याद
इस तरह हम दुःख को पकड़े रहते हैं
जीवन भर दुःख से जकड़े रहते हैं।
ललन चतुर्वेदी
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दुःख हमारे सिर पर ठोकर मारने वाली चिड़िया है
जो कहीं से उड़ कर आती है अचानक
एक झटका देती है अकस्मात
जब तक संभलते हैं हम
वह फिर पहुंच जाती है
हम उसे पकड़ने की कोशिश करते हैं
वह फुर्र से उड़ जाती है
हम हैं कि कोशिश करते हैं बार-बार
उड़ती हुई चिड़िया को पकड़ने की
उसके चले जाने के बाद भी
करते रहते हैं ठोकर की याद
इस तरह हम दुःख को पकड़े रहते हैं
जीवन भर दुःख से जकड़े रहते हैं।
ललन चतुर्वेदी
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