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अपना ख्याल रखियेगा
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बहुत अजीब लगता है
तब और भी जब अपने कहते हैं-
अपना ख्याल रखियेगा।

अक्सर मोबाइल पर आधुनिक बच्चे
यह सलाह देना नहीं भूलते
जो वर्षों से प्रवास पर होते हैं
जिनकी प्रतीक्षा में पथरा जाती हैं
मां-पिता की व्याकुल आंखें

प्रेमिकाओं की मजबूरी
फिर भी समझ में आती है
पर क्या कहूं पत्नियों के बारे में
जो अपना फर्ज निभाने में नहीं चूकतीं-
अपना ख्याल रखियेगा

बहुत आसान है कहना- ख्याल रखियेगा
पर कितना कठिन है अपना ख्याल रखना
अपनों के दूर रहने पर
केवल अपने ही ख्याल आते हैं
आदमी अपना ख्याल नहीं रख पाता

ज़िन्दगी इतनी औपचारिक हो जाएगी-
इसका हरगिज अनुमान नहीं था
इतने भावशून्य  होते हैं रिश्ते!
इतने गणितीय होते हैं संबंध!
मानो दो पक्षों के बीच हो कोई अनुबंध
अगर सेवा- शर्तों में हुई थोड़ी सी चूक
टूट जायेंगे सारे बंधन अटूट

नेह-नाता में भी नहीं रही मिठास
कैसा समय का यह क्रूर अट्टहास
रिश्तों ने इस तरह छला है कि -
विश्वास पक्का हो चला है
अपना ख्याल रखने में ही भला है।
                             ---   ललन चतुर्वेदी

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बिना पूंजी के रोजगार ***************** आलीशान, ऊंचे महल में चींटियां  छिद्र ढूंढ़ती हैं एक नौसिखुआ आलोचक उत्तम कलाकृति की खामियां गिनाता है कोई कुटिल,कुपाठी हर प्रसंग में अपना टांग अड़ाता है नौका में सवार मुफ्तखोर, निठल्ला नखों से नाव में छेद बनाता है कोई दुस्साहसी मुंह ऊपर उठाकर आकाश पर जोर से थूकता है बिना पूंजी के इतने सारे रोजगार हैं यहां मंदबुद्धि मंदी पर मगजमारी कर रहे हैं।
बात जो सबसे जरुरी है ****************** कुछ बातें पूछी नहीं जातीं कुछ बातें कही नहीं जाती सिर्फ महसूस की जाती हैं जरा सा भी चूक हुई  कि नष्ट हो जाती है मर्यादा मनुष्य, मनुष्य नहीं रह जाता इसलिए जो बात पूछी न जाए उसे जरूर पूरी की जाए और जो बात कही न जाए उसे ध्यान से सुना जाए ध्यान रहे जो बातें सबसे जरुरी होती हैं उन्हें कहना-सुनना जरूरी नहीं होता।